The Day - Today (आज दिन)

by. Ms. Purnima Varman

Again,

The day was quite chilly today.

The business was a bit slow

At the tiny-little, 

Shiny-tidy shops

At the beach.


There was no sign of

The tourists,

The fishermen also

Didn’t have much hope for the day.


The cool breeze felt as 

Papers blowing in the air

Forming the new

Verses and anecdotes

Bit by bit.


I felt lost

In the cool drizzle

Everything was at rest 

In this noisy town


Let’s preserve this 

Precious day in the wallet,

will look at it

Later leisurely.



आज दिन

आज दिन

आज दिन

फिर ठंडा था।

सागर तट पर सजी सजाई

चमकी दमकी

नन्हीं-नन्हीं दूकानों में

धंधा कुछ मंदा था।

सैलानी जत्थों की कोई

भीड़ नहीं थी

मछुआरों को भी दिन से

उम्मीद नहीं थी

सर्द हवा के झोंके

पन्नों से उड़ते थे

नए-नए अनुबंधों छंदों

को बुनते थे

हल्की–हल्की बौछारों में

मन खोया था

शोर भरी इस नगरी में

सब कुछ सोया था

चलो कीमती इस दिन को

बटुए में रख लें

पढ़ा करेंगे फिर फुर्सत में

धीरे-धीरे. . .